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डिज‌िटल भारत की बुलंद तस्वीर

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लो जी भारत अब डिजिटल हो रहा है। जो पिछले 20 साल से कंप्यूटर खटखटा रहे थे और मोबाइल पर गिटपिटा रहे थे, वे स‌िर्फ झक मार रहे थे। दस साल से दफ्तरों में बाबुओं पर जो ई-गवर्नेंस का डंडा था, वह जो भी हो मगर डिजिटल इंडिया नहीं था।

इंड‌िया डिजिटल तब होता है, जब देश का प्रधानमंत्री दर्जन भर उद्योगपतियों के साथ कहे क‌ि अब डिज‌िटल सप्ताह शुरू। अब पूरे मुल्क को मान लेना चाहिए क‌ि देश डिज‌िटल हो गया, जो पिछले साठ साल में नहीं हुआ। वह आज हो गया है।

पिछले साठ साल का जुमला हमारे प्रधानमंत्री जी का प्रिय वाक्य है। वह ऐसा कुछ करना चाहते हैं, जो पिछले साठ साल में नहीं हुआ। हम सबको यकीन है कि वह ऐसा कुछ करके रहेंगे, जो पिछले दशकों में स्टीब जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग, बिल गेट्स, स्पीलवर्ग और सर स्टीफन हाकिंग भी नहीं कर सके।

पिछले साठ साल में इंड‌िया ड‌िज‌िटल नहीं हुआ, दुन‌िया ड‌िज‌िटल नहीं हुई। अब होगी। अब देश का बच्चा-बच्चा डिज‌िटल होगा। अगर आपके द‌िमाग में यह सवाल है कि बच्चा-बच्चा कंप्यूटर गेम खेलता है और दिनभर मोबाइल से चिपका रहता है तो बता दें कि यह उसका डिज‌िटल होना नहीं है।

देश और दुन‌िया का हर आदमी अभी तक लिटरल (शाब्द‌िक)है। अब भी उसे मोहन, लॉरेंस, हाम‌िद, करतार जैसे नामों से बुलाना पड़ता है। उसे ड‌िज‌िटल करना ही अब लक्ष्य है। अभी हर नागर‌िक का नाम एक शब्द है और यह बहुत से भ्रम पैदा करता है। इसलिए ड‌िजिटल इंड‌िया में ड‌िज‌िटल नाम का कांसेप्ट चलेगा। यह वह कांसेप्ट है जो अब तक साठ साल में नहीं हुआ।

‌अतः ड‌िज‌िटल ‌इंड‌िया का अर्थ यह होना चाहिए क‌ि रजिस्ट्रेशन नंबर की तरह नाम मिलें। जन्म मृत्यु पंजीकरण विभाग अंकों में नाम दे। अधिकारियों, नेताओं के ल‌िए वीआईपी अंक रिजर्व हों। अमीर लोग अपने बच्चों के लिए लकी अंक और अच्छे अंक बोली लगाकर खरीद सकें। गरीब के बच्चों के लिए जट‌िल अंक मुफ्त हों।

इस डिज‌िटल इंड‌िया में आपके नाम से ही आपकी हैस‌ीयत पता चल जाएगी। सिर्फ आप की ही नहीं आपके बाप की भी। मसलन अगर आपका नाम 837452908 है तो आपका बाप बेहद गरीब और मेहनतकश था। अगर आपका नाम 11111 है तो आप जरूर देश के किसी महान पर‌िवार से होंगे, जिसने कभी मेहनत की होगी और दूसरों को उल्लू बनाया होगा। आपको हर कोई जानता होगा। 22222 और 99999 तक नाम वाले भी ‌रइसों की संतान होंगे।

इससे समाज गजब तरक्की करेगा। जब आपका नाम 837452908 होगा तो कौन आपको याद रखना चाहेगा। ‌आपका कोई दोस्त नहीं होगा। ऐसे जट‌िल नाम वाले अपने आप समाज से अलग थलग हो जाएंगे। ऐसे में ड‌िज‌िटल इंड‌िया तरक्की करेगा, जिसमें स‌िर्फ वीआईपी नाम, नहीं नंबर होंगे।

(साभार:अमर उजाला)

Report :- Desk
Posted Date :- 01-07-2015
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